जल चक्र क्या होता है? और वाष्पन क्या होता है? समझाइये
जल चक्र क्या होता है?
रोज सुबह सूरज निकलता है और सूरज की धुप से धरती पर उपस्थित पानी सूरज की गर्मी (ऊर्जा) के कारण गैस में परिवर्तित हो जाता है यह क्रिया हम वाष्पन (Vaporization) कहलाती है।
समुन्द्र से काफी मात्रा में पानी का वाष्पन होता है। हवा में पानी वाष्प के रूप कुछ परसेंट हमेशा उपस्थित रहता है | वाष्पन की यह क्रिया मरुस्थली इलाके के वातावरण में भी होती है | गर्म हवा में ठंढे हवा की अपेक्षा अधिक मात्रा में जल उपस्थित होता है |
जल-वाष्प से युक्त गर्म हवाएं आकाश की तरफ ऊपर उठने लगती हैं और इस तरह ऊपर उठने के कारण ये गर्म हवाएं ठंडी होती चली जाती है और ठंडी हवा में पानी ज्यादा देर तक हवा के रूप में नहीं रहता है जिसके कारण वाष्पित जल फिर से द्रव्य में परिवर्तित होने लगता है | इस क्रिया को कंडेंसशन (Condensation) कहते हैं |
संघनन की प्रक्रिया में छोटी-छोटी पानी की बुँदे (Droplets) बनती हैं जिन्हे हवा अपने साथ बहाकर ले जाती है|
इन्हे हम बादल कहते हैं | जब एक ही जगह पर पानी की बूंदों की संख्या बढ़ जाती है तो ये वर्षा के रूप में धरती पर बरसने लगती हैं | इस क्रिया को (Precipitation) कहते हैं |
इस क्रिया के द्वारा हुई बारिश का पानी शुद्ध होता है, क्यूंकि समुद्रीय जल के वाष्पन के समय ठोस अशुद्धियाँ समुद्र में ही रह जाती है | इस तरह बारिश से समुद्रों-नदियों आदि में फिर शुद्ध जल पहुंच जाता है|
उसका फिर वाष्पन होता है, संघनन होता है और बारिश होती है और यह क्रम लगातार चलता रहता है| इस तरह धरती की सतह से वायुमंडल में जल के चक्र की प्रक्रिया को प्राकृतिक जल-चक्र कहते हैं |
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